loading...

भोपाल। निश्चित रूप से इसे इत्तेफाक ही माना जाएगा कि लगातार 5 दिन में पुलिस पर तीसरा हमला हुआ है लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि आखिर क्या कारण है जो मध्यप्रदेश में पुलिस पर हमले हो रहे हैं। क्या मप्र के अपराधी पहले से ज्यादा ताकतवर और पुलिस कमजोर हो गई है या फिर पुलिस के अत्याचार इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि उस पर हमले होने लगे हैं। तीसरा हमला बड़वानी जिले में हुआ है। यहां हेड कांस्टेबल पर धारदार हथियार से हमला किया गया।

राज्य में पांच दिनों के भीतर पुलिस पर हमले का यह तीसरा मामला है। सबसे पहले बदमाशों ने दिवाली की रात छतरपुर जिले में कांस्टेबल बाल मुकुंद प्रजापति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद झाबुआ जिले के कल्याणपुरा में बदमाशों ने हेड कांस्टेबल का धारदार हथियार से हमला कर हाथ काट दिया। तीसरा मामला बड़वानी जिले के कुकड़वा बेड़ा गांव का है। यहां ओझर चौकी में पदस्थ हेड कांस्टेबल जगदीश बासले स्थायी वारंटी सखाराम वेस्ता को पकड़ने के लिए पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान गुडा उर्फ तेरसिंह, बगल और अन्ना उर्फ सौगंध कालू ने पुलिसकर्मी को घेर लिया और उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया।

Loading...

सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या आखिर क्यों इस तरह के हमले हो रहे हैं। नक्शे पर देखें तो छतरपुर, झाबुआ और बड़वानी में काफी अंतर है। ऐसा नहीं कि ये सभी थाने एक ही एसपी या आईजी के हों। अत: बात मध्यप्रदेश पुलिस की है। यदि कहा जाए कि मप्र के बदमाश ज्यादा निर्भीक और पुलिस कमजोर हो गई है तो गलत होगा। मप्र में इस तरह की अराजकता का माहौल नहीं है। यदि होता तो बदमाश आम जनता का जीना मुश्किल कर देते।

अब सवाल उठता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि पुलिस इतनी अत्याचारी हो गई है कि लोग पलटकर हमले करने लगे। मीडिया के जरिए ज्यादातर केवल वही कहानियां सामने आतीं हैं जो पुलिस की ओर से बताई जातीं हैं। एसपी का बयान ही सर्वमान्य सत्य होता है। हमले का मीडिया ट्रायल कभी नहीं होता। इससे पहले जब पुलिस की शिकायतें की जातीं थीं तो वरिष्ठ अधिकारी उसे गंभीरता से लेते हैं। एक बड़ा अंतर देखने को मिला है कि इन दिनों एसपी स्तर के अधिकारी टीआई या उससे नीचे के कर्मचारियों की शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई बार तो वो खुलकर बचाव करते नजर आते हैं। कहीं यह कारण तो नहीं कि बदमाश हमलावर हो रहे हैं।

loading...