सिवनी। विवाहिता द्वारा जहरीली वस्तु सेवन कर लेने से गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। जहां उसे डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने पर लखनादौन एसडीओपी देवी सिंह ठाकुर द्वारा जांच में पाया गया कि मृतका ने पति और मामा ससुर के तानों से तंग आकर आत्महत्या की है।

लखनादौन एसडीओपी ठाकुर ने बताया कि जिला दतिया थाना झिंंगना गांव फलोधर निवासी परिवार जंगली जड़ी बूटियां व दवाईयां बेचने के लिए लखनादौन न्यायालय परिसर के सामने अपना डेरा लगाकर व्यवसाय कर रहा था। डेरे में सुनेरी बाई 25 वर्ष अपने पति करन चित्तौड़िया और मां बाप के साथ रह रही थी।

गत 4 अक्टूबर की दोपहर सुनेरी बाई पति करण के साथ जंगल लकड़ी बीनने गई थी। जहां से सुनेरी डेरे में वापस लौटी और बेहोश हो गई जिसे मां बाप द्वारा लखनादौन अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि सुनेरी बाई ने किसी जहरीली दवा का सेवन कर लिया है और उसकी हालत गंभीर है।

जिस पर सुनेरी बाई को लखनादौन अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने पर सुनेरी की मौत हो चुकी थी। एसडीओपी ठाकुर ने बताया कि फलोधर निवासी सुनेरी बाई का विवाह दिल्ली नजफगढ़ निवासी करण चित्तौड़िया के साथ एक साल पूर्व हुआ था। विवाद के बाद से ही सुनेरी बाई को पति करण और मामा ससुर विजयपाल अक्सर प्रताड़ित करते थे।

जिसके बाद सुनेरी पति के साथ मां बाप के डेरे में आकर रहने लगी थी।

लेकिन यहां भी करण सुनेरी को प्रताड़ित करने लगा जिससे तंग आकर 4 अक्टूबर को सुनेरी ने जंगल में जहरीली दवा का सेवन कर लिया था। घटना के बाद करण लखनादौन छोड़कर दिल्ली नजफगढ़ भाग गया था। लखनादौन एसडीओपी ने जांच के दौरान मृतका सुनेरी के मां बाप के बयान के आधार पर मृतका के पति करण चित्तौड़िया और मामा ससुर विजयपाल के विरुद्घ 306, 498 ए, 120 बी के तहत मामला दर्ज कर लिया था।

एसपी तरुण नायक के निर्देश पर लखनादौन एसडीओपी ठाकुर ने लखनादौन थाना प्रभारी नवीन जैन, एएसआई राजेश दुबे और आरक्षक अजय बरमैया की टीम गठित की। टीम ने नजफगढ़ स्थित आरोपियो के ठिकाने पर दबिश दी तो करण चित्तौड़िया पुलिस की पकड़ में आ गया।

कार्रवाई होती देख मामा ससुर विजय पाल भागने में कामयाब हो गया। पुलिस बल आरोपी करण चित्तौड़िया को लेकर लखनादौन पहुंचा और आरोपी को लखनादौन न्यायालय में पेश किया जहां से बुधवार को आरोपी को जेल भेज दिया गया है।

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